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चूना-पत्थर फैक्ट्री के विरोध में कुक्षी में धरना दिया

चूना-पत्थर फैक्ट्री के विरोध में कुक्षी में धरना दिया

राहुल सेन मांडव
मो 9669141814

कुक्षी न्यूज/चूना-पत्थर फैक्ट्रियों के विरोध में आज मध्य प्रदेश नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार की मौजूदगी में आक्रोशित आदिवासी समाज द्वारा विजय स्तंभ चौराहे कुक्षी पर धरना प्रदर्शन किया। जिसमें क्षेत्र के आदिवासी प्रमुखता से मौजूद रहे। इस दौरान विधायक सुरेन्द्र सिंह बघेल, आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल, धार जिला कांग्रेस अध्यक्ष स्वतंत्र जोशी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस, जयस कार्यकर्ता एवं आदिवासी समाज के लोग मौजूद थे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण किसी भी कीमत पर चूना फैक्ट्री के लिए अपनी जमीन नहीं देंगे और जल, जंगल व जमीन की लड़ाई अंतिम दम तक लड़ेंगे। प्रभावित गांवों के सरपंचों, पटेलों, तड़वी समाज के प्रतिनिधियों और अन्य ग्रामीणों ने दो दिन पहले बैठक कर 23 दिसंबर से कुक्षी में धरना प्रदर्शन शुरू करने का निर्णय लिया।

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आपको बता दे कि धार जिले की कुक्षी तहसील के कई गांवों में चूना पत्थर की खोज और सीमेंट फैक्ट्री प्रस्ताव के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन तेज हो गया है। राजस्थान की श्री सीमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा खनिज खोज के लिए ड्रिलिंग शुरू किए जाने के विरोध में सोमवार को कुक्षी में धरना प्रदर्शन और चक्का जाम किया गया। विरोध के बाद सीमेंट कंपनी ने बुधवार से ग्रामीण क्षेत्रों में की जाने वाली ड्रिलिंग स्थगित कर दी है। जिला प्रशासन की ओर से आए अधिकारी ने इसकी घोषणा की। क्षेत्र के बामनबयडी, टकारी, घोड़ा, तलावडी, चितावरा, खारी, मोगरा, डाबड़ी और भीमपुरा सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री लगने से उन्हें विस्थापन और खेती की जमीन छिनने का खतरा है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि इससे जल, जंगल और जमीन पर भी बुरा असर पड़ेगा।

 

नेताप्रतिपक्ष ने कहा

धरने पर बैठे लोगों को संबोधित करते हुए नेताप्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने कहा कि भाजपा सरकार निरंतर आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और धरोहर को नुकसान पहुँचा रही है। कॉर्पोरेट प्रेम में डूबी मोदी सरकार अपने मित्रों को लाभ पहुँचाने के लिए जल, जंगल और जमीन की बलपूर्वक लूट कर रही है। क्या यही भाजपा का तथाकथित विकास मॉडल है? कहा कि मैं आदिवासी भाइयों-बहनों के साथ कदम-से-कदम मिलाकर सड़कों पर खड़ा हूँ और सड़क से सदन तक आदिवासी अधिकारों की लड़ाई पूरी मजबूती और संकल्प के साथ लड़ने हेतु आयोजित धरना कार्यक्रम में सहभागिता दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि मैं यहां पर एक आदिवासी होने के नाता आया हूं ना की कोई नेता के रूप में।

 

महेश पटेल ने कहा कि आज देश में मनमानी की राजनीति चल रही है। देश के मूल आदिवासियों के लिए सरकार ने सोचना बंद कर दिया है? वह अपने मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए देश की संपत्ति और धरोहर बेच रही है। हम धरने के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि जल जंगल और जमीन पर आदिवासियों का अधिकार है और सरकार अगर आदिवासियों से उनका हक छीनने का प्रयास करेगी तो हम एकजुट होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। कहा कि ग्रामीणों के विरोध के बावजूद भी फैक्ट्रियां ड्रिलिंग कर रही है, जिसे नहीं रोका गया तो आंदोलन रुकेगा नहीं। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को सरकार कमजोर न समझे, इस देश में सबसे पहले आदिवासी निवासरत रहे हैं, हमारे आदिवासी योद्धाओं ने देश की आजादी में भी अहम योगदान दिया था। वह आज भी अपने अधिकार के लिए लड़ना जानते हैं।

आदिवासी कांग्रेस ने कहा

आदिवासी कांग्रेस मध्य प्रदेश के महासचिव सुनील स्टार चौहान ने संवाददाता को टेलिफोनिक चर्चाओं में बताया कि आदिवासियों पास 2, 3 बीघा मात्रा जमीन रहती है जिस पर वह खेती करके अपना गुजारा करते हैं ऐसे में कोई भी फैक्ट्रियां समाज के लोगों को आहत करने के लिए लगाई जा रही है। सरकार ने आदिवासियों को भरोसे में लेकर उनके हित के फैसले करना चाहिए, लेकिन यहां विपरीत काम हो रहे है। आज हमारे समाज में प्रदर्शन शुरू किया है अगर सरकार की मनमानी रही तो यह प्रदर्शन जारी रहेगा।

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